बाबासाहेब ‘आंबेडकर’ से जुड़ी वो 5 बातें जो BJP को कर सकती है परेशान

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Babasaheb ambedkar एक अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। उनका नाम समाज में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाने के लिए भी जाना जाता है। लेकिन अब उन्हें बाबासाहेब भीमराव रामजी आंबेडकर के नाम से जाना जाएगा। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा में एक प्रस्ताव पास कराया जिसके बाद उनके नाम में रामजी जोड़ दिया गया।

क्यों हुआ था विवाद

उत्तर प्रदेश में अभी कुछ दिन पहले ही अंबेडकर की एक मूर्ति को तोड़ दिया गया था। जिसके बाद मूर्ति को दोबारा बनावाया गया और उस पर भगवा रंग चढ़ा दिया गया। विलियम शेक्सपीयर ने कहा था कि नाम में क्या रखा है लेकिन इसी नाम को लेकर यूपी में खूब बवाल हुआ।

बाबासाहेब से जुड़ी बातें जिसे बीजोपी नहीं पचा पाएगी

बीजेपी ने ग्राम स्वराज अभियान के तहत अम्बेडकर द्वारा दिए गए संदेशों का प्रचार किया जाएगा। जाहिर है BJP बाबासाहेब के संदेशों को हथियाने के लिए पुरजोर कोशिश कर रही है। लेकिन आईए हम आपको बताते हैं बाबासाहेब के कुछ ऐसे विचार जिसे हजम करने में बीजेपी के लिए थोड़ा मुश्किल साबित हो।

  • एक बार महात्मा गांधी ने बाबासाहेब से मंदिर प्रवेश बिल को लेकर उनका समर्थन मांगा जिसे उनहोंने यह कहकर ठुकरा दिया कि ‘मैं महात्मा को बता देना चाहता हूं कि मेरी यह घृणा हिन्दुओं या हिंदुत्व से नहीं है. बल्कि उनके गलत आदर्शों से है. जिनके आदर्श ही गलत होंगे, वो एक बेहतर समाज का निर्माण कैसे कर पाएंगे. हिन्दुओं से मेरा विरोध उनकी खामियों से कहीं ज्यादा उनके आदर्शों को लेकर है’।
  • जब महामा गांधी ने बाबासाहेब को हिन्दू धर्म में लाने के लिए प्रयास किया था और कहा था कि ‘कोई कड़वी चीज कभी मीठी नहीं हो सकती। चाहे कुछ भी कर लें जहर कभी अमृत तो नहीं हो सकता’।
  • साल 1955 में बाबासाहेब ने घोषणा की थी कि ‘मैं जन्म से हिन्दू हूं क्योंकि उसपर मेरा वश नहीं लेकिन मैं हिन्दू मरूंगा नहीं’।
  • तारीख 14 अक्टूबर, 1956 में ओयोजित एक समारोह में बाबासाहेब ने बौद्ध धर्म को ग्रहण किया था। उन्होंने कहा कि ‘जिस धर्म में मैं पैदा हुआ, उसमें गैरबराबरी और दमन का माहौल था. आज जब मैंने उस धर्म को त्याग दिया है, मैंने नया जन्म लिया है। एक ऐसा धर्म जो इंसानियत की प्रगति में रुकावट है, जो भेदभाव को बढ़ावा देता है और जो किसी को कमतर समझता है, उस धर्म का मैं त्याग करता हूं’।

बाबासाहेब ने ली थी प्रतिज्ञा   

1.मैं त्रिदेवों- ब्रह्मा, विष्णु और महेश में कोई आस्था नहीं रखूंगा।

2. ईश्वर का अवतार कहे जाने वाले राम और कृष्ण को भी नहीं मानूंगा।

3. गौरी, गणपति या किसी भी हिन्दू देवी-देवता की पूजा नहीं करूंगा।

बाबासाहेब ने कहा था कि हिन्दुओं को हिन्दू होने यानी अपनी जाती पर बहुत घमंड है। हिन्दू चाहते हैं कि दलितों को शिक्षा और सत्ता से वंचित रखा जाए। सवर्ण हिन्दू और मुस्लिमों के साथ भी इनका ऐसा ही रवैया है।

बाबासाहेब हिन्दुत्ववादियों और मुस्लिम लीग में कोई अंतर नहीं समझते थे। वे दोनों को एक ही तराजू में तौलते थे। इस पर उन्होंने लिखा कि ‘यह आश्चर्यजनक है कि हिन्दुओं और मुस्लिमों की अलग धार्मिक राष्ट्रीय पहचान के मुद्दे पर सावरकर और जिन्ना दोनों ही पूरी तरह सहमत हैं’।

गौरतलब है कि दामोदर सावरकर को भी खूब सुनाया। उन्होंने कहा कि अगर वे हिन्दू राष्ट्र की मांग से सहमत हैं तो फिर मुस्लिम राष्ट्र की मांग के विरोध में क्यों खड़े हैं।

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बाबासाहेब 'आंबेडकर' से जुड़ी वो 5 बातें जो BJP को कर सकती है परेशान
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Babasaheb ambedkar एक अर्थशास्त्री, राजनीतिज्ञ और समाजसुधारक थे। उनका नाम समाज में दलितों के साथ होने वाले भेदभाव के खिलाफ अभियान चलाने के लिए भी जाना जाता है। लेकिन अब उन्हें बाबासाहेब भीमराव रामजी आंबेडकर के नाम से जाना जाएगा। योगी सरकार ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा में एक प्रस्ताव पास कराया जिसके बाद उनके नाम में रामजी जोड़ दिया गया।
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