जब महज 18 महीनों में भाभा ने की थी परमाणु बम बनाने की घोषणा, डर गया था US

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BHABHA
Homi Jahangir Baba

BHABHA: भारत के मशहूर परमाणु वैज्ञानिक डॉक्‍टर होमी जहांगीर भाभा भारत में ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में अपने काम और अपने स्‍वभाव को लेकर खासा मशहूर थे। इससे भी आगे की बात यह है कि भाभा उन वैज्ञानिकों में से एक थे जिनके नाम से अमेरिका भी कांपता था।

भाभा से डर गया था अमेरिका 

दरअसल अमेरिका को इस बात का खौफ पैदा हो गया था कि कहीं भारत उससे आगे न निकल जाए। यही वजह थी कि भाभा को हर हाल में खत्‍म करने का खौफनाक प्‍लान अमेरिका ने बनाया और उसको अंजाम भी दिया था।

कौन थे डॉ. होमी जहांगीर भाभा

होमी जहांगीर भाभा का जन्म 30 अक्टूबर, 1909 को हुआ था। वो एक मशहूर वैज्ञानिक थे। इन्होंने भारत के परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की कल्पना की थी। उन्होने भारत के कुछ वैज्ञानिकों के साथ मिलकर साल 1944 के मार्च महीने में नाभिकीय उर्जा पर अनुसन्धान की उस समय शुरूआत की थी जब अविछिन्न शृंखला अभिक्रिया की जानकारी बहुत ही कम लोगों के पास थी। या यूं कह लें कि न के बराबर थी।

डॉ. होमी जहांगीर भाभा को ‘आर्किटेक्ट ऑफ इंडियन एटॉमिक एनर्जी प्रोग्राम’ भी कहा जाता है। इनका जन्म मुम्बई के एक सभ्रांत पारसी परिवार में हुआ था। वो अपने काम के लिए दुनिया भर में मशहूर थे। डा. भाभा एक वैज्ञानिक और कमाल के इंजीनियर थे। डॉ. भाभा को साल 1947 में सरकार के द्वारा गठित परमाणु ऊर्जा आयोग के पहले अध्यक्ष के तौर पर नियुक्त किया गया था।

भाभा के कहने पर कई वैज्ञानिक लौटे भारत

  • खास बात है कि देश के आजाद होने के बाद यानी साल 1947 के बाद डॉ. होमी जहांगीर भाभा ने दुनिया भर में कार्यरत हिंदुस्तानी वैज्ञानिकों से कहा कि वे भारत वापस लौट आएं। और बता दें कि उनके इस अपील के बाद कई वैज्ञानिकों पर इसका असर पड़ा और कुछ भारत लौट आए।
  • जो वैज्ञानिक भारत लौट आए थे उनमें से एक थे होमी नौसेरवांजी सेठना। सेठना भाभा के काम से काफी प्रबावित थे। दोनों वैज्ञानिक यानी सेठना और भाभा एक साथ भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने के कार्यक्रम में लग गए। सेठना ही थे जिनकी वजह से डॉ. भाभा के गुजर जाने के बाद भी भारत को परमाणु शक्ति संपन्न बनाने के  कार्यक्रम में कोई बाधा नहीं आई।

18 महीनों में परमाणु बम बनाने की घोषणा

डॉ. भाभा ने मुंबई के कैथड्रल और जॉन केनन स्कूल से अपनी पढ़ाई की। इसके बाद वो एल्फिस्टन कॉलेज मुंबई और रोयाल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस से बीएससी की पढ़ाई पूरी की। मुंबई से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉ. भाभा साल 1927 में इंग्लैंड के कैअस कॉलेज, कैंब्रिज इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने के लिए गए। यहां रहकर साल 1930 में उन्होंने स्नातक की उपाधि ली। उन्होंने साल 1934 में कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से डॉक्टरेट की उपाधि ली। डॉ. भाभा ने जर्मनी में कास्मिक किरणों पर शोध किया. बता दें कि डॉ. भाभा का न्यूक्लियर फिजिक्स की तरफ लगाव बचपन से ही जुनूनी स्तर तक था। उन्होंने पिता को पत्र लिख कर ये बता दिया था कि फिजिक्स ही उनका लक्ष्य है।

  • 24 नवंबर 1966 को फ्रांस के माउंट ब्‍लैंक के आसमान में एक विमान क्रैश हुआ और इसमें मौजूद सभी यात्री मारे गए। इसमें से एक थे डॉक्‍टर होमी जहांगीर भाभा।

अक्टूबर 1965 में भाभा ने ऑल इंडिया रेडियो से घोषणा की थी कि अगर उन्हें छूट मिले तो भारत 18 महीनों में परमाणु बम बनाकर दिखा सकता है। वह मानते थे और काफी आश्‍वस्‍त भी थे कि अगर भारत को ताकतवर बनना है तो ऊर्जा, कृषि और मेडिसिन जैसे क्षेत्रों के लिए शांतिपूर्ण नाभिकीय ऊर्जा कार्यक्रम शुरू करना होगा। इसके अलावा भाभा यह भी चाहते थे कि देश की सुरक्षा के लिए परमाणु बम भी बने। हालांकि यह उनका छिपा हुआ अजेंडा था।

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