दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल” का चौथा दिन महिला सशक्तिकरण एवं परंपरागत संस्कृति के नाम रहा

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नोएडा में स्थित मारवाह स्टूडियो में चल रहे “दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल” का चौथा दिन महिला सशक्तिकरण एवं परंपरागत संस्कृति के नाम रहा इस फेस्टिवल में नाइजीरिया, ऑस्ट्रेलिया के कलाकारों ने अपनी कलात्मकता के माध्यम से दर्शकों का खूब मनोरंजन किया।


कार्यक्रम की प्रारंभिक कड़ी में प्रसिद्ध ओडिसी नृत्यांगना ज्योति श्रीवास्तव ने डांस कर भारतीय कला से लोगों को रूबरू कराया और यह साबित कर दिया कि भारत में विकसित हुई कलाएं पूरी दुनिया के लिए एक मार्गदर्शक का काम कर सकती हैं। ज्योति श्रीवास्तव की परफारमेंस महिलाओं के सशक्तिकरण को डेडीकेटेड थी।

पद्मश्री विमल दास ने फिल्म एवं टेलीविजन के क्षेत्र में अतुलनीय योगदान के लिए ICMEI के प्रेसिडेंट संदीप मारवाह को “ग्रेट सन ऑफ इंडिया” के खिताब से नवाजा। संदीप मारवाह मीडिया एवं एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री के जाने-माने शख्सियत हैं जिन्होंने इस कार्यक्रम को आयोजित किया है।

नोएडा में आयोजित होने वाला यह सबसे बड़ा और पहला कार्यक्रम है जिससे यहां पर नवीन कलाकारों को एक विश्वव्यापी मंच मिला है इससे दुनिया भर की कलाओं से वह अवगत होकर अपनी कलात्मकता को और भी विकसित करने में सक्षम हो पाएंगे।

इस कार्यक्रम में शामिल हुए महानुभाव पारुल मेहता, रामेश्वर, ज्योति श्रीवास्तव, निर्मल वैद आदि जिन्होंने इतने बड़े आयोजन के लिए संदीप मारवा को धन्यवाद कहा और कहा कि इस आयोजन से भारत निश्चित रूप से कला के क्षेत्र में आगे बढ़ेगा।

चौथे दिन के इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलियाई कलाकार फियोना गार्डनर ने भारतीय कला को आत्मसात कर ” मां काली” के रूप में अपनी प्रस्तुति दी जिनका नाम था “थेमेटिक एक्सपेरिमेंटल डांस” एक ऑस्ट्रेलियाई डांसर द्वारा की गई इस डांस परफॉर्मेंस की तैयारी केरल में की गई थी और जिसकी प्रस्तुति दिल्ली में की गई इससे इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत एक बार फिर से दुनिया का मार्गदर्शन करने के लिए तैयार है। क्योंकि भारतीय कला एवं संस्कृति की छाप भारत से बाहर विदेशों पर भी बहुत तेजी से पड़ने लगी है। साथ ही भारतीय कला विदेशी कलाकारों को भी अपनी तरफ आकर्षित करने और अपने रंग में रंगने में कामयाब हो रही है।

मारवाह स्टूडियो के संस्थापक संदीप वर्मा ने कहा की भारत अब दुनिया के लोगों का मार्गदर्शन करने के लिए एक बार फिर से तैयार हो रहा है प्राचीन काल से ही भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति बहुत ही उच्चास्थ शिखर को प्राप्त हुई थी, जिनका दुनिया ने अनुसरण किया और आज समय आ गया है कि अब भारतीय कला संस्कृति का अनुसरण दुनिया फिर से करेगी।

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