मारवाह स्टूडियो में 12वां इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ़ सेलफोन सिनेम का उद्घाटन किया गया

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आज पूरी दुनिया एक फोन में सिमटी जा रही है इसी क्रम में “12 वा इंटरनेशनल फेस्टिवल ऑफ़ सेलफोन सिनेमा” का उद्घाटन मारवाह स्टूडियो में स्वामी विवेकानंद की जयंती के अवसर पर 12 जनवरी को किया गया। इस कार्यक्रम का उद्देश्य समाज में बढ़ रहे फोन के उच्च तकनीकी ज्ञान से सिनेमा को और आगे तक ले जाना एवं लोगों में तकनीक के प्रति जागरूकता को फैलाना है।

दीप प्रज्वलन के साथ कार्यक्रम की शुरुआत की गई जिसमें मुख्य अतिथि कोमोरोस के कॉन्सुल जनरल के एल गंजू, प्रोफेसर डॉक्टर देवेंद्र पाठक, संदीप मारवाह, प्रोफेसर डॉक्टर एनके सिंहा, सीमा गुंबर, योगेश मिश्रा, अशोक त्यागी सहित समाज के कई गणमान्य महानुभावों ने अपनी गरिमा में उपस्थिति दर्ज करा कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।

कार्यक्रम में पेंटिंग आर्टिस्ट पारुल मेहरा की पेंटिंग्स की प्रदर्शनी भी लगाई गई। पारुल ने अपनी पेंटिंग से लोगों को खूब लुभाया। कोमोरोस के कॉन्सुल जनरल के एल गंजू ने कहा कि यह बड़े ही हर्ष का विषय है कि भारत की पेंटिंग्स भी दुनिया में नाम रोशन कर रही है। मैं यह शुभकामनाएं देता हूं कि पारुल की भी पेंटिंग अच्छे मुकाम तक पहुंचे। के एल गंजू ने भारतीय सिनेमा के व्यापकता और दुनिया भर ने इसकी लोक्रियता को खूब सराहा। उन्होंने कहा कि लोग आजकल अपना अधिकतम समय फोन में देते है और फोन सिनेमा के हर व्यक्ति तक पहुंचने का सबसे सुविधजनक उपकरण है। गंजू जी ने संदीप मारवाह को धन्यवाद देते हुए कहा कि मारवाह जी पैनियार ऑफ सेल फोन सिनेमा बने ऐसी मेरी शुकामनाएं है।

ICMEI के प्रेसिडेंट संदीप मारवाह ने सभी अतिथियों का स्वागत किया और कहा कि कुछ प्राप्त करने के लिए डिटरमिनेशन जरूरी होता है और डिटरमिनेशन पावर से ही गोल अचीव हो सकता है। आपके अंदर कुछ पाने और कुछ करने के लिए एक पागलपन होना चाहिए तभी आप अपने लक्ष्य को प्राप्त कर सकते हैं। शुरुआती दौर में लोग मुझे पागल कहा करते थे लेकिन मुझे इससे कोई फर्क नहीं पड़ा मुझे खुशी है कि लोगों ने मेरे बारे में ऐसा कहा क्योंकि मैं वास्तव में अपने लक्ष्य के प्रति पागल था और आपको अपना उद्देश्य पूर्ण करना है तो निश्चित रूप से उसके लिए आपको पागल होना पड़ेगा।

इस कार्यक्रम में संदीप मारवाह को “द फादर ऑफ सेल फोन सिनेमा अवार्ड” से नवाजा गया क्योंकि सिनेमा जगत में फोन के प्रयोग को शुरू करने का एक नया दौर आया है।
योगेश मिश्रा ने कहा कि सिनेमा को आज घर-घर तक पहुंचाने में फोन का सबसे बड़ा योगदान रहा है और इसमें सबसे बड़ी बात यह कि सबसे कम बजट में मूवी बनती है और आजकल हर व्यक्ति के पास मल्टीमीडिया मोबाइल है और लोग घर बैठकर सिनेमा को देख सकता है।

12 वाँ अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल ऑफ सेल फोन सिनेमा के लिए 2 लाख रुपए का पुरस्कर भी घोषित किया गया। सेलफोन सिनेमा को व्यापक रूप से जन-जन तक पहुंचाने के लिए इसका पोस्टर भी लांच किया गया। कार्यक्रम में अशोक त्यागी ने कहा कि भारत में 40 करोड लोगों के पास स्मार्टफोन है जो कि सिनेमा को सबसे बड़ा रूप देने में सहयोग करेंगे।

इंटरनेशनल चेंबर ऑफ मीडिया एंड एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री एक अग्रणीय संस्था के रूप में सेल फोन सिनेमा के लिए कार्य कर रहा है।

स्वामी विवेकानंद की जयंती के शुभ अवसर पर युवा को यह मैसेज भी देने का कार्य किया गया कि अगर युवा बदलते हैं तो इतिहास बदलता है आज कमान युवाओं के हाथ में है और सबसे ज्यादा स्मार्टफोन युवा यूज करते हैं जिसके माध्यम से सिनेमा को एक नया रूप दिया जा सकता है इससे युवाओं में रोजगार और तकनीकी विकास भी होगा।

नमो गंगे ट्रस्ट के प्रेसिडेंट मुकेश कुमार ने स्वामी विवेकानंद की जयंती पर सभी को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह बड़े ही हर्ष का विषय है कि फोन के माध्यम से सिनेमा को घर-घर तक पहुंचाने का कार्य किया जा रहा है। इस कार्यक्रम में नमो गंगे का पोस्टर भी लांच किया गया।
आने वाला समय निश्चित रूप से सेलफोन सिनेमा का ही होगा क्योंकि समय का अभाव और तकनीकी के विकास सेल फोन सिनेमा को बढ़ावा देने का सबसे बड़ा कार्य करेगी।

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