मारवह स्टूडियो में तीन दिवसीय ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल के अंतिम दिन की सुबह कई खास लोग रहे मौजूद

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मारवह स्टूडियो मे चल रहे तीन दिवसीय ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल का आज अंतिम दिन था जिसमें देश विदेश से आए हुए गणमान्य महानुभावों ने अपनी गरिमामय उपस्थिति दर्ज कराई। इस कार्यक्रम में नेहा जोशी, अनुपम घाइ, इरा तक, प्रदीप गुप्ता, मोहसिना मल्होत्रा एवं आई सी एम ई आई के प्रेसिडेंट संदीप मारवाह सहित कइ और गणमान्य लोगों की गरिमामयी उपस्थिति रही । कार्यक्रम की शुरुआत दीप प्रज्वलन के साथ हुई।

कार्यक्रम मे नेहा शर्मा ने बताया कि मारवह स्टूडियो में लड़के और लड़कियों को बराबर सम्मान एवं अधिकार दिया जाता है यहां पर कभी किसी से कोई भेदभाव नहीं किया जाता है और हमारे अंदर महिलाओं के प्रति सम्मान विद्यालयों से ही विकसित होते हैं जिसमें मारवह स्टूडियो एक मील का पत्थर साबित हो रहा है। नेहा शर्मा ने कहा कि हमारी लड़ाई बस इतनी सी है कि सभी क्षेत्रों में एवं सभी कार्यस्थलों पर महिलाओं को बराबर साम्मान एवं अधिकार दिया जाए और उन्हें कभी उपेक्षा की दृष्टि से ना देखा जाए।
नेहा शर्मा ने देश की विभिन्न क्षेत्रों में बड़े पदों पर पहुंचकर महिलाओं का मान सम्मान बढ़ाने वाली तमाम महिला शक्तियों का नाम लिया और उनसे लड़कियों को प्रेरणा लेने की बात कही और बताया कि महिलाओं में अनंत क्षमताएं होती हैं उन्हें किसी से डरने की जरूरत नहीं और यह समाज का अभिन्न अंग है जिसके बिना समाज का अस्तित्व संभव नहीं है।

कार्यक्रम में शामिल हुई इरा तक ने कहा कि महिलाओं की सफलता के पीछे एक महिला का ही हाथ होता है क्योंकि समाज में स्त्रियों के प्रति जो विसंगतियां हैं उन्हें केवल महिलाएं ही दूर कर सकती हैं आज के समय में लड़कियां कहीं भी लड़को से कम नहीं, महिलाएं आज देश में ही नहीं बल्कि दुनिया के सर्वोच्च पदों पर आसीन हैं बस एक स्त्री को पुरुष से भी अधिक सक्षम बनाने में एक स्त्री का सहयोग अति आवश्यक है और वह मां के रूप में, बहन के रूप में समाज के एक सशक्त जिम्मेदार नागरिक के रूप में हो सकता है। उन्होंने कहा कि अगर आप सफल होना चाहते हैं तो ईर्ष्या करना छोड़ दीजिए क्योंकि आगे बढ़ने के लिए ईर्ष्या की नहीं इच्छा शक्ति का होना जरूरी है।

ICMEI के प्रेसिडेंट संदीप मारवह ने कहा कि वर्तमान समय में स्त्रियां भी पुरुषों की तरह समाज के निर्माण में बराबर एवं योगदान दे रही हैं उनके योगदान को देश के प्रति, समाज के प्रति उनके समर्पण को हमें कम नहीं आंकना चाहिए और समाज के निर्माण में जितना योगदान पुरुषों का है उससे कहीं ज्यादा महिलाओं का है महिला पूजनीय है आदरणीय सम्माननीय है।
ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल में मोहसिन मल्होत्रा ने अपनी बात रखते हुए कहा कि सबसे पहले जब मेरी मां ने मेरा नाम मोहसिन रखा तो इस पर लोगों को बड़ी आपत्ति हुई लेकिन अगर आपको आगे बढ़ना है तो समाज की उन कुरीतियों, परंपराओं, बातों को इग्नोर करते हुए चलिए जिनसे आप के व्यक्तिगत जीवन और व्यक्तिगत प्रतिभा प्रभावित होती है।

भारत एक धर्मनिरपेक्ष देश है जहां पर दुनिया की सभी धर्मों को बराबर सम्मान एवं आदर दिया जाता है और आप लोग से यही अपील करता हूं कि सभी धर्मों का समान रूप से सम्मान करें तभी सफलता की बुलंदियों को छू सकते है।
तीन दिवसीय चलने वाले ग्लोबल लिटरेसी फेस्टिवल का अंतिम दिन महिला सशक्तिकरण के नाम समर्पित रहा । कार्यक्रम में शामिल हुई तमाम गणमान्य लोगों ने अपने अपने विचार रखें और महिलाओं को समाज का अभिन्न अंग बताते हुए समाज के निर्माण में उनके योगदान को सराहा और कहा कि समाज व्यक्तित्व और संस्कार के विकास में महिलाओं का जो योगदान रहा है उसे शब्दों में बयां नहीं किया जा सकता। स्त्री एक मां के रूप में, एक बहन के रूप, में एक पत्नी के रूप में और एक पुत्री के रूप में हमारे जीवन को सबसे अधिक प्रभावित करती है और समाज निर्माण के प्रत्येक पहलू में अपना योगदान देती है।
वर्तमान समय में महिलाएं सभी क्षेत्रों में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करके यह सिद्ध कर रही हैं कि महिलाएं किसी से कम नहीं है बस जरूरत है व्यक्ति के विचारों में बदलाव की महिलाओं के प्रति उनके सम्मान की । आज समाज और सोच दोनों बदल रहे हैं तभी महिलाएं आगे बढ़ रही हैं और सामाजिक संतुलन को बनाए रखने के लिए महिलाओं को बराबर सम्मान मिलना चाहिए यह उनका अधिकार है ।

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