मारवाह स्टूडियो में चलने वाले तीन दिवसीय ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल की आखिरी शाम रही शानदार

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नोएडा के फिल्म सिटी में स्थित मारवाह स्टूडियो में चलने वाले तीन दिवसीय ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल का आज अंतिम दिन रहा जिसमें देश विदेश के जाने-माने हस्तियों ने शिरकत की। इस ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल में भारत सहित विदेश की  किताबें भी लांच की गई जो की विभिन्न विधाओं से संबंधित थी, साहित्य जीवन के निर्माण में, समाज के निर्माण से योगदान देने वाला एक ऐसा शास्त्र है जिसके माध्यम से समाज की गहराइयों को समझा जा सकता है। साहित्य लेखन बड़ा ही भावात्मक कार्य है क्योंकि इसमें समाज की विशेषताओं के साथ-साथ भावात्मक शब्दों का जो चयन किया जाता है जो व्यक्ति की मनोदशा पर सबसे ज्यादा प्रभाव डालता है।
साहित्य समाज की समकालीन दशाओं पर लिखा गया एक ऐसा विवरण होता है जिसे हमारी आने वाली पीढ़ियां पढ़कर, समझकर, महसूस कर अपने जीवन में उतारने का प्रयास करती हैं और उस समय के समाज को अपने दौर के समाज से तुलना करके अच्छी चीजें सीखती है और उसके आधार पर अपने वर्तमान के निर्माण में विकासात्मक सुधार करते हैं।
इस कार्यक्रम में लक्ष्मी बाजपेई, संजीव कुमार, सोवाना नारायण, लवलीन थडानी, प्रदीप गुप्ता सहित कई जानी मानी हस्तियां शामिल हुई।
इस अवसर पर लवलीन थडानी की पुस्तक ‘माय सोल फ्लॉवर’ का विमोचन किया गया, उन्होंने कहा की मेरी पुस्तक मेरे ह्रदय को छूती हुई है इसमें आम भाषा की कविता आपको मिलेंगी, जहाँ तक हमारे साहित्य की बात है तो साहित्य समाज का दपर्ण ही नहीं बल्कि सबसे अच्छा साथी है क्योंकि साहित्य का अपना कोई स्वार्थ नहीं होता और भारत का साहित्य, ज्ञान, वेद व पुराण महान है और विश्व ने जो तरक्की की है वह हमारे वेद पुराणों की ही देन है।
ग्लोबल लिटरेरी फेस्टिवल में श्रीमती कुसुम अंसल, डॉ प्रवीण नायर, डॉ मीता पंडित, श्रीमत रीला होता, एन आर जय राम राव, वंश हरी राव, सुनंदा शर्मा लशियन दुबे,संतोष नायर, भारती शिवा जी, पंडित शुभी राम राव को श्री अटल बिहारी वाजपेई अवॉर्ड से सम्मानित किया गया
इस अवसर पर संदीप मारवाह ने कहा की जब आप लेखक  कवियों के बीच बैठते हो की वहां का पूरा माहौल सूफियाना हो जाता है और जहाँ तक लक्ष्मी शंकर की बात है उनका एक एक शब्द न जाने कितनी कविता कहानी कह जाता है। आज समारोह के अंतिम दिन में कह सकता हूँ की हमने इन तीन दिनों में वो सब सुना है जो हम कभी भूल नहीं पाएंगे और यह हमारी पूरी ज़िन्दगी काम आएगा।
शोवना नारायण ने बताया की नृत्य की जो भाव भंगिमा होती है वह अपने आप में बहुत कुछ कह जाती है जो शब्द नहीं कह पाते और जो इसके संगीत और भाव को समझ सकता है वह कुछ भी कर सकता है।
ग्लोबल लिटरेचर फेस्टिवल में सबसे प्रमुख बात यह रही कि तीन दिवसीय कार्यक्रम में लगभग 30 किताबें लांच की गई जो समाज में और बच्चों के जीवन में व्यापक बदलाव लाने में अपना योगदान देंगे पुस्तकें व्यक्ति के जीवन की सबसे अच्छी दोस्त मानी जाती है और व्यक्ति सबसे अधिक पुस्तकों से ही सीखता है और उसे अपने जीवन में उतारने का प्रयास करता है समाज में अगर सकारात्मक लेखक और सकारात्मक विचारधारा प्रसारित होंगी तो समाज की विकृतिया अपने आप ही दूर हो जाएगी।
मारवाह स्टूडियो के संस्थापक संदीप मारवाह ने कहा की आज की इस भागती दौड़ती जिंदगी में हम अपने साहित्य से दूर होते जा रहे हैं, इसलिए मैं अपने छात्रों से यही कहना चाहता हूं कि पढ़ो मेहनत करो कर्म करो लेकिन अपनी अच्छी सोच के साथ ताकि अपने आस पास एक अच्छे समाज का निर्माण कर सको और एक अच्छा समाज बेहतर देश का निर्माण करेगा। उन्होंने कहा कि साहित्य से व्यक्ति के ज्ञान का विकास होता है और ज्ञान से चरित्र का निर्माण होता तथा चरित्र से समाज और देश का विकास होता है। लेकिन यह तभी संभव है जब समाज में अच्छे साहित्यकार हो और अच्छा साहित्य हो क्योंकि व्यक्ति व्यवहारिक जीवन में सबसे ज्यादा पुस्तकों से ही सीखता है और बीते हुए कल की वर्तमान में जानकारी पुस्तके ही देती है जिसके आधार पर भविष्य के निर्माण में सहायता मिलती है। साहित्य समाज का दर्पण है, साहित्य समाज में ऑक्सीजन की तरह कार्य करता है जिसके बिना व्यक्तित्व और समाज का निर्माण संभव ही नहीं है।

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