मारवाह स्टूडियो में दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल का किया गया है आयोजन

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नोएडा के मारवाह स्टूडियो में 3 दिसंबर से 7 दिसंबर तक दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट फेस्टिवल का आयोजन किया गया है। पांच दिवसीय इस कार्यक्रम का पहला दिन बहुत ही शानदार रहा जिसमें देश भर से आए हुए कलाकारों ने अपनी प्रतिभा का खूब प्रदर्शन किया।  दीप प्रज्वलन के साथ इस कार्यक्रम की शुरुआत हुई।
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इस कार्यक्रम में चित्रकला की बेहद खूबसरत प्रदर्शनी भी की गई, चित्रों के माध्यम से व्यक्ति जिन भावों को संप्रेषित करने का अद्भुत कार्य करता है वह व्यक्ति को प्रकृति के बहुत ही करीब ले जाता है। इस कार्यक्रम में शामिल चित्रकारों ने अपनी चित्रात्मक अभिव्यक्ति से वहां पर उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
प्रसिद्ध चित्रकार गौरी ने बताया कि चित्रकारी हमें ईश्वर के सबसे करीब होने का एहसास दिलाती है और इसे समझने के लिए बहुत ही सुंदर मन की आवश्यकता होती क्योंकि चित्रकार अपनी भावनाओं को चित्र के माध्यम से व्यक्त कर समाज को संप्रेषित करता है और यह व्यक्ति को अपनी तरफ आकर्षित करने का कार्य करता है जिससे व्यक्ति के अंतर्मन को खुशी मिलती है।
सुशील भारती ने बताया कि चित्र व्यक्ति का सबसे बड़ा माध्यम होते हैं जिसमें विचारों के कैनवस पर भावनाओं के रंग से अपनी कल्पनाओं को मूर्त रूप देने का कार्य किया जाता है। चित्रकला के माध्यम से सामाजिक, राजनैतिक दसाओं को प्रदर्शित करने का भी कार्य किया जाता है।
इंटरनेशनल चैंबर ऑफ मीडिया एंड एंटटेनमेंट इंडस्ट्री द्वारा आयोजित दिल्ली इंटरनेशनल आर्ट एंड फेस्टिवल में देश भर से आए हुए विभिन्न विधाओं के कलाकारों ने अलग-अलग क्षेत्रों की कलात्मकता को बेहद सुंदर एवं मनोरंजक ढंग से पेश किया इस कार्यक्रम में देश से ही नहीं बल्कि विदेश की प्रतिभाओं ने अपनी कलात्मकता से लोगों का दिल खूब जीता। इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के लारी टी हील, कनाडा के यश कपूर ने अपनी कलात्मकता से लोगों को खूब हंसाया और उनका खूब मनोरंजन किया। चीन के ड्रम ओपेरा ने लोगों में समां बांध दी।
प्रसिद्ध कत्थक नृत्यांगना अनु सिन्हा ने जब अपने शिष्यों के साथ इतना मनमोहक प्रस्तुति दी कि  मानो एक पल के लिए वक्त ही ठहर गया हो। बॉलीवुड कलाकारा मिहिर जुनेजा ने भी सिरकत कर कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई।
कार्यक्रम के अंत में मारवाह स्टूडियो के संस्थापक एवं ICMEI के प्रेसिडेंट संदीप मारवाह ने लोगों को बधाई दी और कहा कि यह बड़े ही हर्ष की बात है कि कला एवं संस्कृति एक देश से दूसरे देशों को एवं एक राज्य से दूसरे राज्यों को जोड़ने का काम करती है इससे बड़ा सामाजिक निर्माण क्षेत्र में कोई कार्य नहीं हो सकता क्योंकि यह विश्व को जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास करता है।
कला एवं संस्कृति के माध्यम से एक देश है दूसरा देश जुड़ता है और वहां पर अपने संस्कृतियों का जो आदान-प्रदान करता है उससे आपसी संबंध भी मजबूत होते है।
भारत वसुधैव कुटुंबकम की भावना से आगे बढ़ रहा है।

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