ISRO: सैटेलाइट ‘IRNSS1I’ मिशन की उलटी गिनती शुरू

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ISRO: गुरूवार का दिन isro  के लिहाज से बेहद खास है। सभी की निगाहें isro के नेवीगेशन satellite irnss-1I पर टिकी  हैं। Satellite को श्रीहरिकोटा से गुरूवार को लॉन्च किया जाना है।

satellite irnss-1i को किया जाएगा लॉन्च

8 अप्रैल को इसरो ने कहा कि यह 12 अप्रैल को श्रीहरिकोटा में अपने स्पेसपोर्ट से एक नेविगेशन उपग्रह लॉन्च करेगा।1,425 किलो प्रतिस्थापन अंतरिक्ष यान में शामिल हो जाएगा। और पुराने सात भारतीय नेविगेशन उपग्रहों, आईए से आईजी का समर्थन करते हैं। जिसे जुलाई 2013 और अप्रैल 2016 के बीच कक्षा में रखा गया था।

satellite GSAT-6A रहा था नाकाम

गौरतलब है कि 29 मार्च को satellite GSAT-6A लॉन्च किया गया था। लेकिन 31 मार्च को जब satellite geo-stationary orbit में दाखिल होने वाला था। ठीक उससे पहले ही संपर्क टूट गया।

इसरो के पखवाड़े के शुरू होने के बाद 2 9 मार्च को भारी रॉकेट पर संचार उपग्रह जीएसएटी -6 ए लॉन्च किया गया। लेकिन 31 मार्च को इसके साथ संचार लिंक खो गया। जब यह भौगोलिक-स्थिर कक्षा में अपने इच्छित स्लॉट के लिए था। (पृथ्वी से लगभग 36,000 किमी)

  • PSLV-C41/IRNSS-1I Launch

The Polar Satellite Launch Vehicle PSLV-C41 will launch the IRNSS-1I. from the first launch pad of the Satish Dhawan Space Centre (SDSC) at the Sriharikota High Altitude Range. The IRNSS-1I launch will happen in XL configuration on board the PSLV rocket. This will be the twentieth time that the PSLV’s ‘XL’ configuration will b launch. The IRNSS-1I will be the eighth satellite to join ISRO’s NavIC navigation satellite constellation.

आईआरएनएसएस-1 सीरीज के IRNSS1H सैटेलाइट की जगह लेगा IRNSS-1I. बता दें कि IRNSS-1I की लॉन्चिंग पिछले साल यानी 31 अगस्त साल 2017 को फेल रही थी। खास बात ये है कि सैटेलाइट भारतीय नेविगेशन मैप सिस्टम यानी NavIC की ताकत बढ़ाएगा।

NavIC  के तहत देश ने अब तक 8 सैटेलाइट लॉन्च किए हैं। सभी सैटेलाइट सफल रहे थे सिर्फ एक सैटेलाइट IRNSS-1H असफल रहा था। इसकी मदद से मैप बनाने, समय का सटीक आंकलन, नेविगेशन और समुद्री नेविगेशन में काफी मदद मिलेगी। ये सैटेलाइट सेना के लिए बेहद खास है क्योंकि इसकी मदद से सेना को नेविगेशन में मदद मिलेगा।

खास बातें

  • इस सैटेलाइट की वजह से भारतीय नैविगेशन मैप सिस्टम की ताकत बढ़ेगा। इस कैटेगरी में अब तक IRNSS-1A, IRNSS-1B, IRNSS-1C, IRNSS-1D, IRNSS-1E, IRNSS-1D, IRNSS-1F, IRNSS-1G और IRNSS-1H सैटेलाइट का सफल परीक्षण रहा है। हालांकि IRNSS-1H का परीक्षण फेल रहा था।
  • ये सैटेलाइट समय का बिल्कुल सही पता लगाने में, नेविगेशन की पूरी जानकारी, मैप तैयार करने, समुद्री नेविगेशन, मैप तैयार करने के अलावा सैन्य क्षेत्र में काफी मददगार साबित होगा।
  • खास बात है कि ये सैटेलाइट IRNSS-1I बिल्कुल स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। सैटेलाइट का लक्ष्य भारत और उसकी सीमा से 1,500 किमी की दूरी के क्षेत्र में इसकी उपयोगकर्ता को सही जानकारी देना है।
  • खास बात है कि ये सैटेलाइट IRNSS-1I बिल्कुल स्वदेशी तकनीक पर आधारित है। सैटेलाइट का लक्ष्य भारत और उसकी सीमा से 1,500 किमी की दूरी के क्षेत्र में इसकी उपयोगकर्ता को सही जानकारी देना है। सैटेलाइट में L5 और S-band नेविगेशन मौजूद हैं। इसमें पेलोड के साथ रुबेडियम अटॉमिक क्लॉक्स भी मौजूद हैं।

आपको बता दें कि ये सैटेलाइट ISRO की IRNSS परियोजना की 9वीं सैटलाइट है।

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