Surgical strike video तारीख 29 सितंबर, 2016 जब भारत के मिलिट्री ऑपरेशन के Director General लेफ़्टिनेंट जनरल रणवीर सिंह ने प्रेस कांफ्रेंस में घोषणा की कि भारत ने सीमापार चरम पंथियों के ठिकानों पर surgical strike की है तो पूरी दुनिया हैरान रह गई.

ऐसा नहीं था कि इससे पहले LOC के पार surgical strike न की गई हो, लेकिन ये पहली बार था कि भारतीय सेना, दुनिया को साफ़ साफ़ बता रही थी कि वाकई में उसने ऐसा किया था. इसकी वजह थी, भारतीय सेना के उड़ी ठिकाने पर चरमपंथियों द्वारा किया गया हमला जिसमें 17 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे और दो सैनिकों की बाद में अस्पताल में मौत हो गई थी.

Surgical strike video: माइक टैंगो को मिली थी जिम्मेदारी

माइक टैंगो (बदला हुआ नाम) के नेतृत्व में 19 भारतीय जवानों ने 26 सितंबर की रात 8:30 बजे अपने ठिकानों से पैदल चलना शुरू किया और 25 मिनटों में उन्होंने LOC को पीछे छोड़ दिया. टैंगो के हाथ में उनकी एम 4 ए1 5.56 एमएम की कारबाइन थी. उनकी टीम के दूसरे सदस्य एम4 ए1 के अलावा इसराइल में बनी हुई टेवर टार-21 असॉल्ट रायफ़लें लिए हुए थे.

  • बेहद कठिन था वापस आना

इस अभियान के लिए स्पेशल फ़ोर्स में उपलब्ध सर्वश्रेष्ठ जवान चुने थे. लेकिन इस तरह के अभियान में कुछ लोगों का हताहत होना अवश्यसंभावी है. इसकी संभावना 99.9999 फ़ीसदी थी और उनकी टीम ये क़ुर्बानी देने के लिए मानसिक रूप से तैयार भी थी. टैंगो मान कर चल रहे थे कि इस अभियान का सबसे कठिन चरण होगा वापसी का, जब पाकिस्तानियों को उनके वहाँ होने के बारे में पूरी खबर ही मिल चुकी होगी.

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4 घंटे चलने के बाद टैंगो और उनकी टीम अपने लक्ष्य के बिल्कुल नज़दीक पहुंच गई. वो वहाँ से 200 मीटर की दूरी पर मौजूद थे कि वो हुआ जिसकी उन्हें उम्मीद नहीं थी. अचानक फायरिंग होने लगी. सारे जवान एक सेकेंड से भी कम समय में ज़मीन के बल लेट गए, लेकिन टैंगो के अनुभवी कानों ने अंदाज़ा लगा लिया कि ये अंदाज़े से की गई फ़ायरिंग है और उसका निशाना उनकी टीम नहीं है. एक तरह से ये बुरी ख़बर भी थी, क्योंकि इससे साफ़ ज़ाहिर था कि लांच पैड के अंदर रह रहे चरमपंथी सावधान थे.

  • 24 घंटे किया इंतजार

इसके बाद टैंगो ने तय किया कि वो उस इलाक़े में छिपे रहेंगे और अपना हमला 24 घंटे बाद अगली रात में बोलेंगे. शिव अरूर बताते हैं, “ये इस ऑपरेशन का सबसे ख़तरनाक हिस्सा था. अंधेरे में तो दुश्मन के इलाक़े में छिपे रहना इतना मुश्किल काम नहीं था, लेकिन सूरज चढ़ने के बाद उस इलाक़े में जमे रहना ख़ासा जीवट का काम था.

लेकिन उससे उन्हें एक फ़ायदा ज़रूर होने वाला था कि उन्हें उस इलाक़े को पढ़ने और रणनीति बनाने के लिए 24 घंटे और मिलने वाले थे. टैंगो ने आख़िरी बार सेटेलाइट फ़ोन से अपने सीओ से संपर्क किया और फिर उसे ऑफ़ कर दिया.

1000 किमी दूर दिल्ली में हलचल

28 सितंबर का रात दिल्ली में भारतीय कोस्ट गार्ड कमांडर्स का वार्षिक भोज हो रहा था, लेकिन इसके बावजूद सभी खास मेहमान रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और सेनाध्यक्ष जनरल दलबीर सिंह ने अपने मेज़बानों से माफ़ी मांगी और सेना के मिलिट्री ऑपरेशन रूम पहुंच गए ताकि वहाँ से उस समय शुरू हो चुके इस अभियान को दिल्ली से मॉनीटर किया जा सके.

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आधी रात को दिल्ली से 1000 किलोमीटर दूर टैंगो और उनकी टीम अपने छिपे हुए स्थान से निकले और उन्होंने लाँच पैड की तरफ़ बढ़ना शुरू किया. लांचपैड से 50 गज़ पहले टैंगो ने अपनी नाइट विजन डिवाइस से देखा कि दो लोग चरमपंथियों के ठिकाने पर पहरा दे रहे हैं.

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इसके बाद “टैंगो ने 50 गज़ की दूरी से निशाना लिया और एक ही बर्स्ट में दोनों चरमपंथियों को धाराशाई कर दिया. पहली गोली चलने तक ही कमांडोज़ के मन में तनाव रहता है.

गोली चलते ही ये तनाव जाता रहता है.” जब टैंगो उत्तरी कमान के प्रमुख लेफ़्टिनेंट जनरल डीएस हूदा से मिलने ऊधमपुर गए तो व्हिस्की का एक और दौर चला. राहुल बताते हैं, “टैंगो ने मन ही मन सोचा, कोई खाना दे दो. सारे दारू ही पिला रहे हैं.”

सेना की इस अभियान पर खूब राजनीति हुई। विपक्ष लागातार सर्जिकल स्ट्राइक के सबूत मांगता रहा है। ऐसा में Surgical strike video विपक्ष के सवालों का जवाब है।

  • मेज़र टैंगो को कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया

20 मार्च, 2017 को surgical strike video करने वाली टीम के पाँच सदस्यों को शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया.

मेज़र टैंगो को राष्ट्पति प्रणव मुखर्जी ने कीर्ति चक्र से सम्मानित किया. उस समय इस बात का ज़्यादा प्रचार नहीं किया गया कि कीर्ति चक्र पाने वाले और कोई नहीं, सर्जिकल स्ट्राइक के हीरो मेज़र माइक टैंगो ही हैं.

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