Transgender: डीयू ने 2017 में कोई ट्रांसजेंडर छात्रों को नहीं लिया, खुलासा

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साल 2014 में दिल्ली विश्वविद्दालय (DU)ने सकारात्मक कदम उठाते हुए ट्रांसजेंडर को यूनिवर्सिटी में पढ़ाने का मौका दिया था। पठन-पाठन के क्षेत्र में डीयू के इस कदम को खूब सराहा गया था। साल 2014 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शिक्षकों के नियुक्ति के लिए भरे जाने फॉर्म में ट्रांसजेंडर को भी जगह दी गई थी। लेकिन ये खबर थोड़ा चौंका देने वाला है।

DU ने नहीं लिया ट्रांसजेंडर छात्रों को

RTI से खुलासा हुआ है कि साल 2017 में डीयू में (रेगुलर कोर्स) एक भी ट्रांसजेंडर स्टूडेंट का एडमिशन नहीं हुआ है। इसके जवाब में पिछले साल का हवाला देते हुए डीयू द्वारा कहा गया कि कैटगरी में बहुत कम आवेदन किए गए थे। इसके अलावा ये भी कहा गया कि कई स्टूडेंट्स ने अपना जेंडर सेलेक्ट करने में गलती की थी।

  • हालांकि डीयू ने भले ही ट्रांसजेंडर के लिए दरवाजा खोल दिया हो लेकिन यहां ट्रांसजेंडर के लिए पढ़ना बेहद मुश्किल है। अक्सर ऐसे स्टूडेंट्स को डीयू के कैम्पस में बद्सलूकी का सामना करना पड़ता है।
  • ये आलम सिर्फ कैंपस तक ही सीमित नहीं है बल्कि एडमिशन के प्रोसेस में भी ट्रांसजेंडर के दाखिले में खूब घालमेल होता है। डीयू के ही एक प्रोफेसर ने कहा है कि ‘शिक्षा ट्रांसजेंडर छात्रों के अनुकूल नहीं हो सकती है लेकिन
    डीयू मिनी-इंडिया की तरह है और इसे इन छात्रों तक पहुंच जाना चाहिए’।

डीयू में ट्रांसजेंडर छात्रों के साथ होती है बदसलूकी

एक ट्रांसजेंडर ने अपना दर्द कुछ इस तरह बयां किया। उसने कहा कि ‘मैंने DU के school of open learning में अपनी पढ़ाई पूरी करने के लिए दाखिला लिया था। लेकिन यहां पर लोगों ने मुझे चिढ़ाना शुरू कर दिया। यहां कोई भी मेरे से ठीक तरीके से बात तक नहीं करता था। इन्हीं चीजों से परेशान होकर मैंने पढ़ाई छोड़ दी’। 

एक ने कहा कि जब कभी भी मैं डीयू कैंपस में जाता था तो लोगों की निगाहें जैसे ही मेरे ऊपर पड़ती थी। अचानक ही उनके चेहरे का हाव-भाव बदल जाता था। लोगों के चेहरों पर अजीब रिएक्शन देखने को मिलते थे। ऐसा लगता था मानो मैं इंसान हीं नहीं हूं। और ये आलम सिर्फ कैंपस में ही नहीं था बल्कि क्लासरूम में भी पढ़ने के दौरान वहां के छात्र अजीब तरीके से घूरते थे। वहां पढ़ाने वाले प्रोफेसरों का भी कुछ ऐसा ही हाल था। लोगों का मेरे प्रती ऐसा बर्ताव ही एकमात्र ऐसा कारण रहा जिसकी वजह से डीयू छोड़ने पर मजबूर मैं मजबूर हुआ।

ट्रांसजेंडर छात्र डीयू में नहीं ले रहे हैं एडमिशन

इन्हीं कारणों की वजह से ट्रांसजेंडर डीयू में अपनी पढ़ाई को या तो बीच में छोड़ देते हैं या फिर ट्रांसजेंडर यहां एडमिशन लेना खुद के लिए मुनासिब नहीं समझते। अब सवाल है कि

  • कौन जिम्मेदार है, शिक्षा के क्षेत्र में इन घटिया अफसानों का?
  • शिक्षा के क्षेत्र में ट्रांसजेंडर के इस तकलीफ का सुध लेने वाला क्या कोई है?
  • क्या डीयू में ट्रांसजेंडर पर पुन: विचार नहीं किया जाना चाहिए?
    ये ऐसे सवाल है जिनका माकूल जवाब मिलना बेहद जरूरी है।

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कहीं न कहीं दिल्ली विश्वविद्दालय के प्रशासन को डीयू कैंपस को ट्रांसजेंडर के लिए अनुकूल बनाने की जरूरत है। ताकि ज्यादा से ज्यादा ट्रांसजेंडर्स अपनी पढाई पूरी करने के लिए यहां आएं और वो यहां महफूज रहें।

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